तुझको बारिश की लड़ी कर दूँ
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| तस्वीर: राधिका दुआ |
तुझको बारिश की लड़ी कर दूँ
अपने हिस्से में कुछ नमी भर लूं
शाम आयी थी कल जो ख़त ले कर
उसके पुर्जे की चाँदनी पढ़ लूं
एक तन्हा सी कोल्ड कॉफ़ी में
चाय की गर्मी, थोड़ी सी भर लूं
चाय की गर्मी, थोड़ी सी भर लूं
तेरे पाजेब की खनक चुनकर
अपने ग़ज़लों में सिम्फनी गढ़ लूं
अपने ग़ज़लों में सिम्फनी गढ़ लूं
यूँ बहक जाती हो, हवा हो क्या
तुझसे मैं इश्क़ की बलून भर लूं
तुझसे मैं इश्क़ की बलून भर लूं
दिल था भरने लगा मिल मिलकर
सो ये सोचा कि फासला कर लूं
सो ये सोचा कि फासला कर लूं
~ विशेष


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